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अनिता सिंहः भेजी थी जो एक दिन तुमने…

भेजी थी जो एक दिन तुमने…
तुम्हारी वो आवाज….!!
मेरे खुश रहने का है
वो राज…!!
होती है जब सुबह..
बनकर मधुर झंकार
जगाती है मुझे…!!
रातों को ले आगोश में अपनी
मीठी नींद
सुलाती है मुझे…!!
रहते तो हो तुम चुप…!
फिर भी ये सब कुछ
बताती है मुझे…!!
जी उठती हूं
उस पल से मैं…
जब से आवाज तेरी
समा गई रूह में मेरी…!!
ये तेरी आवाज ही तो है
बांसुरी तेरी…!!
…. मेरे कान्हा
…. मेरे बेस्टी

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