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थाती जैसी संस्कारों से सजी सामग्री पर श्रेष्ठ सांस्कृतिक फिल्में बन सकती हैं!

*प्रदीप द्विवेदी (bollywoodbazarguide@gmail.com)

थाती जैसी संस्कारों से सजी सामग्री पर श्रेष्ठ फिल्में बन सकती हैं. दैनिक भास्कर के संपादक रहे वरिष्ठ पत्रकार प्रदीप भटनागर ने थाती के विमोचन समारोह का निमंत्रण दिया था और इस संबंध में उन्हीं से उपयोगी जानकारी प्राप्त हुई है.
इस विमोचन समारोह में पश्चिम बंगाल के राज्यपाल पंडित केशरीनाथ त्रिपाठी का कहना था कि- लोकगीतों के जरिए हमारे संस्कार जन-जन तक पहुंचते हैं. इतना ही नहीं, गीत भावी पीढ़ियों तक संस्कारों को पहुंचाते का भी काम बड़ी सहजता से करते हैं.
राज्यपाल त्रिपाठी ने वरिष्ठ साहित्यकार और राजनेता श्रीमती शैलतनया श्रीवास्तव की नव प्रकाशित पुस्तक थाती का प्रयागराज की होटल बिलास में विमोचन किया, पुस्तक विमोचन समारोह में बोलते हुए त्रिपाठी ने कहा कि- पुस्तक थाती हमारे संस्कारों से सजी वह थाली है, जो हमें संस्कारों से जोड़कर आनंद देती है. लेखिका शैलतनया श्रीवास्तव इस काम में सफल हुई हैं. इस अवसर पर लेखिका शैलतनया श्रीवास्तव ने पुस्तक के विषय में जानकारी दी.
यकीनन, बदलते समय के साथ व्यक्ति की समाज और संयुक्त परिवार से दूरी बढ़ती जा रही है, जिसके कारण धार्मिक, सामाजिक और सांस्कृतिक परंपराओं की विविध और आवश्यक जानकारियां लोगों को नहीं मिल पा रही हैं. थाती जैसी पुस्तकें इस संदर्भ में सफल प्रयास हैं. क्योंकि, आजकल फिल्में भी प्रभावी माध्यम हैं, इसलिए थाती जैसी श्रेष्ठ सामग्री पर यदि फिल्में बनाई जाएं तो यह न केवल युवाओं के लिए श्रेष्ठ संदर्भ सामग्री होगी, वरन सांस्कृतिक झरने का प्रवाह भी बना रहेगा.
इस विमोचन समारोह के विशिष्ट अतिथि कलाऋषि पद्मश्री बाबा योगेन्द्र का कहना था कि आज हम भले ही शहरों में रहकर अपने को आधुनिक मान रहे हों, लेकिन हमने पुरखों से मिली अपनी संस्कृति को खोया नहीं है. पारिवारिक उत्सवों में उन्हीं से हमें आनंद प्राप्त होता है.
समारोह की अध्यक्षता कर रहे वरिष्ठ साहित्यकार, पत्रकार सुधांशु उपाध्याय का कहना था कि- परंपरा का काम है पीछे से आगे ले जाना. थाती पुस्तक यही करेगी. यह पुस्तक हमें हमारी परंपराओं से जोड़ती है और हमें आगे ले जाती है. भविष्य की पीढ़ियों के लिए यह पुस्तक बहुत उपयोगी होगी.
इस अवसर पर उच्च न्यायालय की पूर्व न्यायमूर्ति पूनम श्रीवास्तव ने भी अपने विचार व्यक्त किए. रंजना त्रिपाठी के देवी गीत से प्रारंभ हुए कार्यक्रम में श्रीमती कल्पना सहाय ने अतिथियों का स्वागत और वरिष्ठ पत्रकार डा. प्रदीप भटनागर ने सभी के प्रति आभार व्यक्त किया. कार्यक्रम का संचालन प्रसिद्ध गीतकार और कवि शैलेन्द्र मधुर ने किया.

प्राप्त जानकारी के अनुसार… प्रसिद्ध साहित्यकार श्रीमती शैलतनया श्रीवास्तव की इस पुस्तक थाती में उत्तर प्रदेश के लोकजीवन में रचे बसे संस्कारों की विधियों, गीत और चित्रों को उनके व्यापक संदर्भों के साथ संकलित और व्याख्यायित किया गया है. पुस्तक में सनातन धर्म के सोलह संस्कारों में जन्म से लेकर विवाह तक के संस्कारों को शामिल किया गया है. इस अवसर पर पूर्व कैबिनेट मंत्री नरेंद्र सिंह गौर, उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग के पूर्व अध्यक्ष केबी पांडे, ख्यात चिकित्सक डाॅ. आनंद श्रीवास्तव, इ. केके श्रीवास्तव, इ. एके द्विवेदी, सतीश जायसवाल, आरबी सिंह, पीएस उपाध्याय, एसपी श्रीवास्तव सहित अनेक साहित्यकार और साहित्य प्रेमी उपस्थित रहे.

*संपर्क- डाॅ. प्रदीप भटनागर…
https://www.facebook.com/drpradeepbhatnagar?__tn__=%2CdC-R-R&eid=ARBjVNifXkYEbeXoRrMw3DpsgX2TjwqBF_hWWE2kM0FO32uc24cTGqPWcvLlITF8tW-of3Je4Xrhgj4O&hc_ref=ARTvMtnC27utUfSAh2R7JPfRW0mUV4tTwV9T-VAJkIOROCPStFx5lBr2ZOmBJiVUPJ8&fref=nf

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