Image default
Astrology City News

सफल सिंगर बनना है तो देवी स्कन्दमाता की साधना करें!

सफल सिंगर बनना है तो देवी स्कन्दमाता की साधना करें!
प्रदीप द्विवेदी. संगीत के क्षेत्र में सफलता के लिए बुध ग्रह की विशेष भूमिका है. किसी भी व्यक्ति की कुंडली में बुध ग्रह के पांच प्रभाव होते हैं… अतिकारक, कारक, सम, अकारक और अतिअकारक! अतिकारक और कारक बुध अच्छे समय में कम प्रयास में अचानक सफलता प्रदान करता है तो सम और अकारक बुध में पूजा-प्रयोग से कामयाबी संभव है! दरअसल, भाग्य को बदला नहीं जा सकता है, लेकिन पूजा-प्रयोग से भाग्य को संवारा जा सकता है!
संगीत के क्षेत्र में प्रयास के अलावा भाग्य की महत्वपूर्ण भूमिका है इसीलिए इस क्षेत्र में सफलता में बुध के कारकत्व के साथ-साथ अन्य ग्रह योग पर भी निर्भर है कि किसी सिंगर को सफलता दिलानेवाला सबसे प्रमुख ग्रह कौनसा है? यदि बुध ही प्रबल कारक है तो संगीत के क्षेत्र में विशेष प्रसिद्धि मिलेगी, यदि मंगल प्रबल कारक है तो उत्साह बढ़ाने वाले गीत संगीत से, सूर्य प्रबल कारक है तो प्रेरणा गीत-संगीत से, शुक्र प्रबल कारक है तो रोमांटिक गीतों से उस ग्रह विशेष के शुभ गोचरवश भ्रमण, शुभ महादशा-अंतरदशा आदि के दौरान सफलता और प्रसिद्धि मिलती है! इसके ठीक विपरित अकारक, मारकेश ग्रहों के गोचरवश भ्रमण, महादशा-अंतरदशा के दौरान गीत-संगीत का पूरा खजाना ही अच्छे समय के इंतजार में पड़ा रहता है!
पूजा-प्रयोग शुभाशुभ समय में शुभत्व बढ़ाने और अशुभ से सुरक्षा प्रदान करने का कार्य करते हैं. पूजा के परिणाम हर समय शुभ रहते हैं लेकिन धीरे-धीरे प्रभाव दिखाते हैं और प्रयोगों के त्वरित नतीजे मिल सकते हैं किन्तु परिणाम उल्टे भी हो सकते हैं इसलिए अपना भाग्य संवारने के लिए पूजा मार्ग उत्तम है, अनावश्यक प्रयोग नहीं करें तो बेहतर है!
जिन्हें अक्सर शिकायत रहती है कि उनके काम को पर्याप्त महत्व नहीं मिलता है और जिन्हे संगीत के क्षेत्र में कामयाबी चाहिए तो नियमितरूप से बुध की देवी स्कन्दमाता  की पूजा-अर्चना करें, यदि नियमितरूप से संभव नहीं हो तो हर नवरात्रि की पंचमी तिथि को देवी दुर्गा के पांचवें स्वरूप स्कन्दमाता  की पूजा-अर्चना करें. 
देवी दुर्गा का पांचवां स्वरूप स्कंदमाता है. देवी स्कंदमाता, सिंह पर सवार हैं.
और माता की चार भुजाएं हैं. माता अपने दोनों हाथों में कमल का फूल धारण करती हैं और एक हाथ सें भगवान कार्तिकेय को अपनी गोद में लिये बैठी हैं जबकि माता का चैथा हाथ श्रद्धालुओं को आशीर्वाद प्रदान करता है.
देवी स्कन्दमाता की पूजा-अर्चना से बुध ग्रह की अनुकुलता प्राप्त होती है इसलिए कला-संगीत के क्षेत्र में सफलता के लिए श्रद्धालुओं को देवी स्कन्दमाता की आराधना करनी चाहिए. देवी की इस मंत्र से पूजा-अर्चना करें… ओम देवी स्कन्दमातायै नमः!

बाॅलीवुड में कामयाबी के लिए…

* देवी दुर्गा के नौ रूप हैं, जिनकी नवरात्रि में आराधना की जाती है.

* देवी दुर्गा का तीसरा स्वरूप चंद्रघंटा है.

* देवी के माथे पर घंटे के आकार का अर्धचंद्र होने के कारण इन्हें चंद्रघंटा कहा जाता है.

* देवी चंद्रघंटा के दस हाथ हैं जिनमें इन्होंने शंख, कमल, धनुष-बाण, तलवार, कमंडल, त्रिशूल, गदा आदि शस्त्र धारण कर रखे हैं. 

* सिंह पर सवार देवी चंद्रघंटा का युद्ध के लिए सुसज्जित स्वरूप है.

* देवी चंद्रघंटा की पूजा-अर्चना से शुक्र ग्रह की अनुकुलता प्राप्त होती है.

* बाॅलीवुड में कामयाबी के लिए… देवी चंद्रघंटा की आराधना करनी चाहिए.

* देवी चंद्रघंटा की इस मंत्र से पूजा-अर्चना करें… देवी चन्द्रघण्टायै नम:॥

ब्यूटी विद् ब्रेन चाहिए तो महागौरी को मनाइए!

सुंदर दिखना सभी को अच्छा लगता है और यदि ब्यूटी विद् ब्रेन हो तो क्या कहने? यदि ब्यूटी विद् ब्रेन चाहिए तो माता महागौरी को मनाइए! रविवार को नवरात्रि की अष्टमी है। यह दिन माता महागौरी की पूजा-अर्चना का खास अवसर है। माता महागौरी को सुंदरता और ज्ञान की देवी माना जाता है। देवी महागौरी की आराधना से परिवार में सौंदर्य और शैक्षिक समृद्धि आती है। 
ऐसा माना जाता हैं कि भगवान शिव को पाने के लिए की गई कठोर तपस्या के कारण देवी पार्वती का रंग श्याम और शरीर कमजोर हो गया था। इस तपस्या से प्रसन्न होकर जब भगवान शिव ने माता पार्वती का शरीर गंगाजल से धोया तो वह विद्युत सदृश्य सुंदर हो गया। इसी कारण इन्हें महागौरी पुकारा जाता है। जिन्हें सुंदरता और ज्ञान चाहिए उन्हें गंगाजल से पवित्र स्नान करके माता महागौरी की पूजा-अर्चना करनी चाहिए।
माता महागौरी राहु की देवी हैं, इसलिए राहु ग्रह के कुप्रभाव से मुक्ति के लिए देवी महागौरी की आराधना सर्वोत्तम है। रविवार को अष्टमी है जब देवी महागौरी की पूजा की जाती है। बच्चों की उत्तम पढ़ाई के लिए माता महागौरी की आराधना का यह श्रेष्ठ अवसर है।
उत्तम पढ़ाई के लिए ही देवी महागौरी का दूसरा स्वरूप देवी सरस्वती है। देवी सरस्वती भी राहु की देवी हैं जिनकी पूजा-प्रार्थना से मतिभ्रम से राहत मिलती है। इसीलिए विद्यालयों में पढ़ाई से पहले ज्ञान की देवी सरस्वती की वंदना करवाई जाती है। 
नवरात्रि के दौरान माता सरस्वती की पूजा का विधान है.

Related posts

राजेंद्र वर्मा खूबडू…. कमाल की हरियाणवी देसी धमाल!

BollywoodBazarGuide

प्रदीप द्विवेदी…. आज का दिन!

BollywoodBazarGuide

Sneha Wagh visited Ajmer!

BollywoodBazarGuide

Leave a Comment